रजौली (नवादा) प्रखंड क्षेत्र में साधारण बुखार और डेंगू के लक्षण में अंतर करना लगभग असंभव है।ऐसे में केवल लक्षण के आधार पर वायरल फीवर और डेंगू,टाइफाइड, मलेरिया बुखार की पहचान नहीं की जा सकती है।देह,हाथ में तेज दर्द,आंख में दर्द अगर हो तो ऐसे में बिना जांच कराएं कोई भी दवा नहीं खानी चाहिए।डेंगू के बढ़ते मरीजों की संख्या के बाद अनुमंडलीय अस्पताल रजौली प्रभारी उपाधीक्षक डॉ दिलीप कुमार ने कहा की डेंगू से बचाव के लिए जानकारी देते हुए बताया कि डेंगू फीवर होने के बाद मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी प्लेटलेट्स घटने की होती है,ऐसे में अगर समय पर प्लेटलेट्स मरीजों के शरीर में नहीं चढ़ाया जाए तो ऐसे में मरीजों की जान जा सकती है।उन्होंने कहा कि डेंगू फीवर होने की स्थिति में सबसे पहले मरीजों को डी हाइड्रेशन से बचना चाहिए।अगर आप सही मात्रा में पानी का सेवन कर रहे हैं और आपको हर 6 घंटे में पेशाब करने जाना पड़ता है तो यह अच्छा संकेत है,पर अगर आपकी नजर धुंधली हो या कहीं से रक्त स्राव हो तो उसे अनदेखा ना करें और अपने डॉक्टर से तुरंत परामर्श करें।
डेंगू के लक्षण इस प्रकार होते
डेंगू का सबसे प्रमुख लक्षण तेज बुखार है।डेंगू में 102 से 103 डिग्री तक बुखार आना आम बात है।डेंगू में छोटे लाल चकत्ते या रैशज हो जाते हैं।इन रैशज में कभी-कभी खुजली भी होती है।जी मिचलाना भी एक लक्षण है।डेंगू में आपको घबराहट महसूस होती है।ज्यादातर डेंगू से पीड़ित लोग आपके पीछे दर्द की शिकायत करते हैं।यह दर्द आंखों की मूवमेंट से बढ़ता है।डेंगू में थकावट महसूस होती है।डेंगू में ज्यादातर जोड़ों मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द होता है।घबराए नहीं सही समय पर कराएं।चिकित्सक ने कहा कि डेंगू एक वायरल फीवर है,जो मादा मच्छर के काटने से फैलता है और यह बुखार किसी भी आयु वर्ग को हो सकता है।मच्छर के काटने के 4 से 7 दिन बाद डेंगू के लक्षण नजर आते हैं।डेंगू बुखार होने पर रोगी एवं उनके परिवार के सदस्यों को घबराना नहीं चाहिए।नीम हकीम इलाज से बचें,अच्छे डॉक्टर से परामर्श लें और उनके सुझाव अनुसार रोगी की देखभाल करें।उन्होंने कहा कि बुखार के दौरान शरीर या माथा में दर्द होने पर किसी भी परिस्थिति में पेरासिटामोल छोड़कर कोई भी अन्य दवा नहीं लेनी चाहिए।