विकास बनने लगा विनाश का कारण : कटते पेड़ और कागज पर वृक्षारोपण से आग का गोला बना नवादा।

नवादा

जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

रजौली– इन दिनों क्षेत्र में भीषण गर्मी का दौर जारी है।विकास के नाम पर हजारों पेड़ काट दिए गए हैं।और कागजो पर हो रहे वृक्षारोपण से इस वर्ष इतनी भीषण गर्मी का एहसास लोगों को हुआ है इससे पहले इतनी भीषण गर्मी का एहसास कभी नही हुआ है।

                   जानकार बताते हैं कि पर्यावरण को संतुलित रखने के लिये एक जिले के भूभाग का 35 प्रतिशत भाग में पेड़-पौधे होने चाहिए लेकिन नवादा जिले में पेड़-पौधे को सिर्फ कागजों पर लगाकर अपने कर्तव्य इतिश्री कर लिया गया है।जिले में लगातार हो रहे तापमान में बढ़ोत्तरी से जाहिर है कि विकास अब विनाश का कारण बनता जा रहा है।

वन विभाग और मनरेगा योजना के तहत प्रतिवर्ष लाखों पौधे लगाने का भी कोई असर नही : आश्चर्य तो यह है कि प्रत्येक वर्ष वन विभाग और मनरेगा योजना के तहत लाखो पेड़ लगाया जाता है जिसमे लगभग करोड़ो रूपया का खर्च आता है।लेकिन इसका लाभ नजर नही आता है।

लगाने से ज्यादा काट लिए गए पेड़ कार्यवाई शून्य : वन विभाग अधिकतर पेड़ कागजो पर लगाकर अपने कर्तव्य से इतिश्री कर लेता है लेकिन पेड़ काटने वालों पर भी कार्यवाई से भागती है।क्योंकि एक पेड़ काटने के बदले 10 पेड़ लगाने का कानून बना है जबकि रजौली से बख्तियारपुर फोरलेन सड़क बनाने वाली कंपनी के द्वारा सड़क के किनारे लगभग हजारों विशाल पेड़ को काट दिया गया है।और वृक्षारोपण के नाम पर पुराने कटे और सूखे लकड़ियों को जमीन में गाड़ कर खानापूर्ति किया गया है।वही कई लोगों ने बताया कि विकास के नाम पर हरे पेड़ो की कटाई से बढ़ते तापमान के कारण जीना मुश्किल हो जायेगा।जिसका असर मनुष्य,पशु-पक्षी और कृषि पर भी पड़ना तय है।