जिलाधिकारी ने इण्टरमीडिएट उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में अनुपस्थित शिक्षकों को बर्खास्त करने का दिया निर्देश।

जमुई
जनादेश न्यूज़ जमुई
जमुई (ब्यूरो अजीत कुमार/संजय कुमार) जिले के +2 उच्च विद्यालय जमुई और +2 उच्च विद्यालय सतायन में इण्टरमीडिएट परीक्षा की 91,000/- उत्तरपुस्तिका आई हुई है और उसका सफल मूल्यांकन भी पदाधिकारियों की देख रेख में सुचारू है। शनिवार 29 फरवरी को एनआईसी सभागार में आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा बिहार सरकार शिक्षा विभाग के सचिव के सख्त निर्देश के आलोक में जिलाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार ने जिला शिक्षा पदाधिकारी विजय कुमार हिमांशु को विधि सम्मत कारवाई करने का निर्देश दिये हैं। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी विजय कुमार हिमांशु ने बताया कि इण्टरमीडिएट परीक्षा की उत्तरपुस्तिका को जांच में अनुपस्थित जिला परिषद नियोजन इकाई से संबंधित शिक्षकों को बर्खास्त करने के लिए उप विकास आयुक्त सह सचिव अरूण कुमार ठाकुर को 100 शिक्षकों को बर्खास्त करने का प्रपत्र शनिवार 29 फरवरी को कार्यालय प्रकोष्ठ में भेजा गया है।वहीं नगर परिषद जमुई को 7+15=22 शिक्षकों को बर्खास्त करने का प्रपत्र भेजा गया हैं। ज्ञात हो कि इसके तीन दिन पूर्व भी 26 शिक्षकों को बर्खास्त करने का प्रपत्र भेजा गया है। वहीं +2 उच्च विद्यालय जमुई में 42,000/- उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन वित्त रहित 35 शिक्षकों के द्वारा सफलता पूर्वक,कड़ी निगरानी में कराई जा रही है। वहीं +2 उच्च विद्यालय सतायन जमुई में कुल 49,000/_ उत्तरपुस्तिका प्राप्त हुई है। जिसके मूल्यांकन हेतु 106 वित्त रहित शिक्षकों के द्वारा सहजता पुर्वक,कड़ी निगरानी में करायी जा रही है, और अनुपस्थित 100 शिक्षकों को बर्खास्त करने का प्रपत्र आज उप विकास आयुक्त सह सचिव अरूण कुमार ठाकुर को अग्रसारित किया गया है। उक्त कारवाई नियोजित उच्च माध्यमिक शिक्षकों द्वारा इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन केंद्र पर योगदान नहीं देने के कारण किया गया है। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथा समयबद्ध कार्य है, जो राज्य के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। इसके द्वारा जानबूझकर मूल्यांकन कार्य से अनुपस्थित रहकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। इस प्रकार अत्यंत महत्वपूर्ण तथा समयबद्ध सरकारी कार्य में गंभीर बाधा उत्पन्न किया गया है तथा सरकारी आदेश का भी उल्लंघन किया गया । भारतीय दंड संहिता के तहत सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाना अपराध है। इसके अतिरिक्त बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 की धारा( 9 )एवं (10 ) में स्पष्ट उपबंध है कि जिस किसी को किसी परीक्षा का मूल्यांकन आदि का कार्य सौंपा गया हो, वह सौपे गए कर्तव्यों का पालन करने से इनकार नहीं करेगा और इस उपबंध का उल्लंघन करना अपराध हैं। इस प्रकार मूल्यांकन कार्यों से अनुपस्थित रहकर, इन्होंने इस प्रावधान का स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया है, जो बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। इनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की जाती है।