रजौली (नवादा) प्रखंड क्षेत्र में बारिश का मौसम चल रहा है।ऐसे में किसान बरसात में खखसी की खेती से काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।वैसे तो खखसी बरसात के सीजन में अपने आप भी उग जाता है।अधिकतर जंगलों में इसके पौधे आसानी से देखे जा सकते हैं।खखसी की बाजार में मांग भी काफी है और इसके भाव भी अच्छे मिल जाते हैं।कई जिला में इसकी खेती की जाती है।यह एक हरी और गोल-मटोल कांटे वाली सब्जी होती है।इसका उपयोग सब्जी बनाकर खाने में तो किया ही जाता है।इसके अलावा इसका आचार भी बनाया जाता है।इस सब्जी को लोग इतना पसंद करते हैं कि बाजार में आते ही इसे हाथों-हाथ खरीद लेते हैं।रजौली बाजार में इसका भाव 150 रुपए किलोग्राम तक होता है।
सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता
खखसी को हाई ब्लडप्रेशर की बीमारी के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है।इसमें मोमोरेडीसिन तत्व पाया जाता है। जिससे इसमें एंटी ऑक्सीडेंट व एंटीडायबिटीज के गुण होते हैं।यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।खास तौर पर हाई ब्लड प्रेशर और वजन कम करने के लिए इसकी सब्जी को काफी कारगर माना जाता है।
बारिश में बाजार में आसानी से मिलता
खखसी जिनकी सब्जी बनाकर बड़े चाव से लोग खाते हैं।बारिश का सीजन शुरू होते ही बाजार में यह सब्जी आनी शुरू हो जाती है। इस फसल की खासियत ये है कि जितनी ज्यादा बारिश होती है उतना ही खखसी की अच्छी और अधिक पैदावार होती है।इसलिए यह सब्जी बारिश के समय ही आपको देखने को मिल जाएगी
कहां मिलते हैं,खखसी के बीज
खखसी का बीज आपको बाजार में नहीं मिलेगा।इसलिए आप इसके बीजों को बाजार से खरीद कर नहीं ला सकते हैं।यहां तक कि कृषि विभाग भी इसके बीजों को नहीं रखता है।इसका बीज आपको जंगलों में ही मिल सकता है और यही कारण है कि इसकी सप्लाई जंगल से ही की जाती है।जंगल में ही खखसी की पैदावार होती है।सीजन खत्म होते ही पके खखसी के बीज गिर जाते हैं, जब पहली बारिश होती है।तब इसकी बीज जंगल में फैलने लग जाती है।तभी आप इसे जंगल में देख सकते हैं।
खखसी की खेती का उचित समय
खखसी की खेती का उचित समय जून-जुलाई का महीना होता है।इसमें इसकी फसल काफी तेजी से बढ़ती है।इसकी खेती गर्म और कम ठंडक वाले मौसम में की जा सकती है। इसकी खेती के लिए 27 से 32 डिग्री सेल्सियस तक तापमान उपयुक्त माना गया है।यह सब्जी बिजाई के 70 से 80 दिन की अवधि में कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
कैसे की जाती खखसी की खेती
खखसी की खेती सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है,लेकिन खेत में पानी के निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।जल भराव वाली भूमि इसकी खेती के लिए अच्छी नहीं होती है।खखसी की खेती के लिए सबसे पहले खेत की मिट्टी को ट्रैक्टर या हल की सहायता से जुताई करके समतल कर लेना चाहिए।तीन बार हल से जुताई करें व अंतिम जुताई के बाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए 15 से 20 टन गोबर या जैविक खाद डालें।अब तैयार किए गए बैड में 2 सेंटीमीटर की गहराई में 2 से 3 बीजों की बुवाई करें इस दौरान मेड से मेड की दूरी करीब 2 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी करीब 70 से 80 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।अब बीज बोने के बाद सिंचाई करें।इसके बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें। हालांकि बरसात के मौसम में इसमें सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि उस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहती है।यदि बरसात नहीं हो तो ऐसी स्थिति में एक से दो सिंचाई एक सप्ताह के अंतराल में करनी चाहिए।इसकी फसल पहली बार में 70 से 80 दिन में तैयार हो जाती है।वहीं दूसरे साल इसकी फसल 25 से 40 दिनों में ही तैयार हो जाती है।खखसी का भाव सामान्यत: बाजार में 90 से 100 रुपए तक होता है।वहीं कई जगहों पर भारी डिमांड के कारण इसका भाव 150 रुपए तक पहुंच जाता है।