रजौली में नहीं थम रहा आवारा कुत्तों का आतंक,गली-मोहल्ले में लोग हो रहे शिकार

नवादा

जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

रजौली (नवादा) प्रखंड क्षेत्र में अब शहर का ऐसा कोई मोहल्ला या गली नहीं है।जहां आवारा कुत्ते न हो।शहर के सड़कों से लेकर छोटे से छोटे गली मोहल्ले में इनका आतंक चल रहा है।जो हर दिन हर मोहल्ले-गली में किसी न किसी को काटते जरुर है।लगातार इनका आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है।इसके बाद भी जिम्मेदार नगर पंचायत इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहा है।जिसकी वजह से इनकी संख्या में तेज गति से बढ़ते ही जा रही है।इनकी संख्या से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि इन्हें पकड़ा नहीं गया और संख्या नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो यह रजौली वासियों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने आएगा।हर गली मोहल्लों में आवारा कुत्तों का झुंड देखा जा सकता है।कई चौक-चौराहें में कुत्तों का झुंड आक्रमक होता है जो बाइक सवार पैदल राहगीर या चार पहिया वाहनों के पीछे दौड़ते हैं।इसकी वजह से कई बार दुर्घटना का शिकार भी होते हैं।यह हाल शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में दोनों जगहों में है।लगातार बढ़ रहे कुत्तों के हमले को लेकर लोगों का यह कहना है कि मांस मटन की दुकानें इसका बड़ा कारण है।इन दुकानों के संचालकों द्वारा दुकान से निकले अपशिष्ट को जहां तहां फेंक दिया जाता है।अपशिष्ट को लेकर कुत्तों में लड़ाईया होती रहती है और यह आक्रमक रवैया अपनाने लगते है और धीरे-धीरे इनका आक्रमक रवैया लोगों के खिलाफ में भी देखने को मिलता है।

हर गली-मोहल्लों में कुते का बना हुआ आतंक

रजौली शहर के पुरानी बस स्टैंड बजरंगबली चौक,बाईपास रोड,संगत मोड़,शिवाला मोड़,हरदिया,दिबौर, चीतरकोली,अमावां,मुरहेना,बांके मोड़,महादेव मोड़ आदि मोहल्ले ऐसे है।जिनके लगभग हर गली में आवारा कुत्ते मिलते है।जो झुंड बनाकर रहते है और किसी पर हमला करते है तो अकेले नहीं करते है बल्कि कई कुत्ते एक साथ हमला करते है।

कुत्तों का सक्रिय दो दर्जन से ज्यादा झुंड

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दो दर्जन से ज्यादा बड़े झुंड है।इन झुंड में कम से कम डेढ़ से दो दर्जन तक के कुत्ते रहते है,साफ है कि एक झुंड में रहने से इसका आतंक भी तेज गति से बढ़ जाता है।जो यदि किसी पर हमला करते है तो एक प्लानिंग के तहत करते है।वही इनके झुंड की संख्या भी लगातार बढ़ते ही जा रही है।इन पर लगाम लगाना बेहद जरुरी हो गया है अन्यथा इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते है।

महिला व बच्चे आसानी से हो जाते कुता का शिकार

कुत्ते भी ज्यादातर बुजुर्ग,महिलाएं और छोटे बच्चों को काटते है,क्योंकि हमला होने की दशा में यह जल्द से जल्द भाग नहीं पाते हैं।अनुमंडलीय अस्पताल रजौली पहुंचने वाले ज्यादा मामलों में बुजुर्ग,महिला और बच्चे ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते है।इन आवारा कुत्तों पर रजौली वासियों ने भागने का मांग किया है।