रजौली (नवादा) प्रखंड क्षेत्र में ककड़ी की खेती करने से किसान अच्छी आमदनी कर रहे हैं।प्राणचक गांव के किसान विक्रम कुमार,मुद्रिका प्रसाद,संजय कुमार,धीरज कुमार ने बताया कि ककड़ी एक लघु वर्गीय फसल हैं,जो खीरे के बाद दूसरे नंबर पर सबसे अधिक लोकप्रिय हैं।रजौली में इसकी खेती किसान नगदी फसल के रूप में करते हैं।इसकी खेती कम लागत में अच्छा मुनाफा देता है।रजौली के सभी जगह में लगभग सभी क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है।यह किसान का मूल की फसल है।जिसे जायद की फसल के साथ उगाया जाता है।इसके फल एक फीट तक लम्बे होते हैं।ककड़ी को मुख्य रूप से सलाद और सब्जी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।गर्मियों के मौसम में ककड़ी का सेवन अधिक मात्रा में किया जाता है।जैसा की हम सभी जानते हैं कि गर्मियों का मौसम अभी चरम पर पहुंच रहा है।ऐसे में बाजार में इसकी मांग भी बढ़ती जा रही है।किसान इसकी खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं।
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इन विधि से करें ककड़ी की खेती
ककड़ी की खेती करने का समय अक्टूबर के मध्य माह में इसके बीज बोए जाते हैं।जनवरी में बोना चाहिए।फरवरी और मार्च के महीन फसल बिकना शुरू हो जाता है।बलुई और दुमट मिट्टी में अच्छी होती है।इस फसल की सिंचाई सप्ताह में दो बार करनी चाहिए।ककड़ी में सबसे अच्छी सुगंध गरम शुष्क जलवायु में आती है।इसमें दो मुख्य जातियाँ होती हैं।एक में हलके हरे रंग के फल होते हैं तथा दूसरी में गहरे हरे रंग के।इनमें पहली को ही लोग पसंद करते हैं।ग्राहकों की पसंद के अनुसार फलों की तुड़ाई कच्ची अवस्था में करनी चाहिए।इसकी माध्य उपज लगभग 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती हैं।ककड़ी की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे बेहतर हैं। बारिश के मौसम में इसके पौधे ठीक से विकास करते हैं।गर्मियों का मौसम पैदावार के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता हैं।ठंडी जलवायु फसल के लिए अच्छी नहीं होती हैं।क्योंकि यह मुख्यतःगर्मी की फसल हैं।इसके पौधे पूर्ण रूप से 25-35 डिग्री सेल्सियस के बीच ही विकसित हो सकते हैं।इसके साथ ही बीजों का जमाव लगभग 20 डिग्री सेल्सियस से कम के तापमान पर संभव नहीं हैं।लेकिन अधिक तापमान इसके लिए अच्छा नहीं होता हैं।
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ककड़ी की खेती के लिए जमीन
ककड़ी की खेती करने के लिए सभी क्षेत्रों में सफलता पूर्वक की जाती हैं।इसकी खेती किसी भी उपजाऊ प्रकार की मिट्टी में आसानी से की जा सकती हैं।इसकी अच्छी पैदावार के लिए कार्बनिक पदार्थो से युक्त बलुई और दोमट मिट्टी को काफी बेहतर माना गया हैं।इसकी खेती में भूमि जल निकासी वाली होनी चाहिए।जल भराव वाली भूमि में ककड़ी की खेती करनें से बचे। ककड़ी की खेती में सामान्य पी.एच 6.5 से 7.5 मान वाली मिट्टी की आवश्यकता होती हैं।ककड़ी की अधिक मात्रा में पैदावार प्राप्त करने के लिए इसके खेत को अच्छी तरह से तैयार करना होता है।इसके खेत को अच्छे से तैयार करने के लिए शुरुआत में खेत में मौजूद सभी तरह के घास फूस को नष्ट कर खेत की मिट्टी पलटने वाले हलों से जुताई करें।जुताई के बाद खेत में पानी चलाकर उसका प्लेन कर दें।प्लेन करने के तीन से चार दिन बाद जब सतह की मिट्टी हल्की सूखने लगे तब खेत में ट्रैक्टर चलाकर खेत की अच्छे से जुताई कर मिट्टी भुर-भुरी बना लें।ककड़ी की बीजों की बुवाई समतल भूमि और मेड़ बनाकर की जाती हैं।इसकी बुवाई कार्य से पहले तैयार खेत में नाली बनानी चाहिए और मिट्टी में जब नमी हो तो बुवाई कार्य शुरू कर देना चाहिए। नमी वाली मिट्टी में ही ककड़ी के बीजों का अंकुरण और विकास अच्छा हो सकता हैं।