यूरिया से पौधे हो रहे रसीले और मुलायम,बढ़ रहा कीटों का प्रकोप

नवादा

जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

रजौली (नवादा) प्रखंड क्षेत्र में यूरिया के इस्तेमाल से पौधों में हरियाली व विकास तेजी से होता है लेकिन पौधों की यही विशेषता कीटों व रोग को भी न्यौता देती है।मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ने से पौधे रसीले व मुलायम हो जाते हैं।इससे कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है।ऐसे में खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच जाती है।एक बार कीटों का प्रकोप हुआ तो इसे नियंत्रित करना आसान नहीं होता है।किसान धान और गेहूं की खेती करते हैं।दोनों फसलों में अंधा-धुंध यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है।रोपाई के कुछ दिनों बाद यूरिया का छिड़काव करते हैं।वहीं दाने और बालियां निकलने से पहले भी खेत में यूरिया डाली जाती है। कुल मिलाकर कई हजार मीट्रिक टन से अधिक यूरिया की खपत होती है लेकिन यूरिया फसल के लिए घातक भी साबित हो रही है।

फसल के लिए लाभदायक है,पोटास

फसल में पोटास का इस्तेमाल अब नाममात्र का हो रहा।कुछ गिने-चुने किसान ही अपने खेतों में पोटास डाल रहे हैं।जबकि खाद फसलों के साथ ही मिट्टी की सेहत संवारने में काफी कारगर है।पोटास से फसल के दाने चमकीले होते हैं।वहीं मिट्टी में जल धारण की क्षमता भी बढ़ती है। इससे मिट्टी की परत नरम बनी रहती है और बेहतर ढंग से पौधों की जड़ों का विकास होता है।

क्या कहते हैं,अधिकारी

रजौली कृषि पदाधिकारी सारंजय कुमार ने कहा कि यूरिया के अधिक उपयोग से फसल में कीट व रोग का प्रकोप बढ़ता है।एक बार कीटों का प्रकोप होने के बाद फसल को बचाना काफी मुश्किल हो जाता है।इसलिए किसानों को मानक के अनुरूप ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए। किसानों को अपने खेतों में पोटास का भी इस्तेमाल करना चाहिए।