रजौली : 75 शैय्या अनुमंडलीय अस्पताल आज भी जरुरी सुविधाओं से वंचित है। रजौली अनुमंडल के बाद अब रजौली को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हो गया लेकिन इलाज के नाम पर आज भी कई समस्याएं हैं जिन पर न तो स्वास्थ्य व प्रशासन के अधिकारी ध्यान देते हैं और न कोई जनप्रतिनिधि या नेता ही। रजौली अनुमंडल बने 31 वर्ष बीत गए, अनुमंडलीय अस्पताल बने 5 वर्ष बीत गए लेकिन इस अरसे में न तो अस्पताल को हड्डी रोग विशेषज्ञ मिले और न ही महिला चिकित्सक। एनएच-31 पर नजदीकी अस्पताल तो है लेकिन दुर्घटनाग्रस्त मरीजों का इलाज करने वाला न तो हड्डी के डॉक्टर हैं और न सुरक्षित मातृत्व के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था।
हालांकि स्थानीय लोगों द्वारा बार-बार प्रशासन के साथ विधायक व सांसद से लेकर मंत्री तक मुद्दा उठाया गया। लेकिन वादे, आश्वासन व घोषणाएं के अलावे लोगों को कुछ नहीं मिला।
आये दिन सड़क दुर्घटनाएं होने पर घायल लोग सबसे पहले इसी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन प्राथमिक उपचार कर सुविधा नहीं होने की बात कहकर लोगों को तुरंत ही रेफर कर दिया जाता है।
👉स्वीकृत पदों से कम हैं एएनएम, चिकित्सक व अन्य कर्मी–
75 बेड के इस अनुमंडलीय अस्पताल में स्वीकृत पदों की तुलना में एएनएम, सामान्य चिकित्सक व विशेषज्ञ चिकित्सकों समेत जरूरी कर्मियों की भारी कमी है। 25 विशेषज्ञ चिकित्सक समेत 33 चिकित्सकों की जगह पर मात्र 5 चिकित्सक ही इलाज के लिए उपलब्ध हैं। एक मात्र एमडी डॉक्टर सतीश चन्द्र सिन्हा जो यहां पदस्थापित हैं, उनका सदर अस्पताल नवादा में प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। वहीं ए ग्रेड 50 जीएनएम की जगह लगभग 25 जीएनएम ही पोस्टेड हैं। अस्पताल की व्यवस्था को चलाने के लिए हॉस्पिटल मैनेजर भी नहीं है। इनकी जगह पर पीएचसी के हेल्थ मैनेजर प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे हैं।हालांकि अस्पताल में दो एम्बुलेंस है लेकिन इनमें से एक एम्बुलेंस अक्सर खराबी के कारण गैरेज में ही रहती है।
👉अस्पताल में होती ट्रामा सेंटर तो मरीजों को समय पर मिलती चिकित्सा सुविधा–
अस्पताल में अगर ट्रॉमा सेंटर की सुविधा होती दुर्घटना से पीड़ित लोगों को समय पर सभी चिकित्सा सुविधाएं मिलती। व्यक्तियों का उपचार करने की सभी सुविधाएं उपलब्ध होती है। ट्रॉमा सेंटर होने से सर्जन चिकित्सक से लेकर अत्याधुनिक आँपरेशन थियेटर, कई उपकरणें अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि मशीनें व इसके टेक्नीशियन की व्यवस्था होने से यहां के लोगों को काफी सहूलियतें होती।
👉दो बार विधायक बने प्रकाशवीर व नवादा के युवा सांसद चंदन कुमार ने भी अस्पताल की कमियों पर कोई ध्यान नहीं दिया
नवादा सांसद तो लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कभी भी अस्पताल का मुआयना करना भी मुनासिब नहीं समझा। भाजपा मंडल अध्यक्ष गौरव शांडिल्य उर्फ गगन ने बताया कि अस्पताल में जो भी मूलभूत सुविधाओं की कमी है, उसके लिए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को वर्चुअल मीटिंग, मोबाइल व व्हाट्सएप के माध्यम से बारीकियों से अवगत कराया हूं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि जल्द से जल्द अस्पताल में जो भी कमियां है, उसे दूर करने का प्रयास करुंगा।