सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को आत्महत्या मामले में अंतरिम जमानत देने के अपने कारण बताए। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अंतरिम आदेश अगली कार्यवाही तक जारी रहेगा और प्रथम दृष्टया अर्नब के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को आत्महत्या मामले में अंतरिम जमानत देने के अपने कारण बताए। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अंतरिम आदेश अगली कार्यवाही तक जारी रहेगा और प्रथम दृष्टया अर्नब के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला नहीं बनता।
इस फैसले पर अर्नब ने सुप्रीम कोर्ट और वकील हरीश साल्वे का आभार व्यक्त किया और उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद कहा।
एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा- “मैं आज हाथ जोड़कर सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करूंगा कि उन्होंने ये फैसला दिया। दूसरी बात, जिस तरह से श्री हरीश साल्वे ने हमारे साथ खड़े रहकर सुप्रीम कोर्ट के सामने हमारी बात रखी, उसके लिए मैं आभार व्यक्त नहीं कर सकता, मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं।”
“मुझे जेल से निकले दो हफ्ते हो चुके हैं। जेल में रहते समय मैंने बहुत कुछ सोचा और जो मुझे कहना था मैंने उसी दिन कह दिया था जब मैं अपने स्टूडियो में गया कि कोशिश ये है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को बंद किया जाए। आप जो रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को बंद करना चाहते हैं, मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप क्यों बंद करना चाहते हैं? आपको किस बात का डर है? आप संकोच मत कीजिए, मुझे बताइए खुलकर। अगर आप क्रोध की भावना से कोई काम कर रहे हैं तो क्रोध क्यों हैं? जो भी रिपोर्टिंग मैंने की तो उसके बारे में आप क्रोध क्यों करते हैं? आप सोचते क्यों नहीं हैं कि जो काम मैं कर रहा हूं वो आपको करना चाहिए था।”
आगे उन्होंने लोगों का आभार जताते हुए कहा- “मैं कितने लोगों से आज धन्यवाद कहूं, मैं कितने लोगों को अपना आभार प्रकट करूं लेकिन मैं नहीं कर सकता। ये वीडियो सबको भेजे और कहें कि अर्नब गोस्वामी आपको धन्यवाद करना चाहता है और आपको प्रणाम करना चाहता है। जितने हमारे बुजुर्ग हैं, उनको चरणस्पर्श। सभी चाहनेवालों को बहुत बहुत धन्यवाद।”
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दो साल पुराने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पत्रकार अर्नब गोस्वामी और दो अन्य को दी गई अंतरिम जमानत तब तक जारी रहेगी जब तक बॉम्बे हाई कोर्ट याचिका का निपटारा नहीं कर देता और साथ ही कहा कि न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपराधिक कानून नागरिकों का चुनिंदा तरीके से उत्पीड़न करने के लिए हथियार ना बनें।
सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को 11 नवंबर को अंतरिम जमानत दी थी।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि याचिका पर बंबई उच्च न्यायालय के फैसला करने के दिन से चार सप्ताह बाद तक अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत कायम रहेगी।
पीठ ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, लोअर कोर्ट को राज्य द्वारा आपराधिक कानून के दुरुपयोग के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपराधिक कानून नागरिकों को चुनिंदा तरीके से उत्पीड़ित करने का हथियार ना बनें।
पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “उन नागरिकों के लिए इस अदालत के दरवाजें बंद नहीं किए जा सकते, जिन्होंने प्रथम दृष्टया यह दिखाया है कि राज्य ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया।” साथ ही कहा कि एक दिन के लिए भी किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनना गलत है।