रजौली (नवादा) प्रखंड क्षेत्र में बारिश के मौसम में सब्जियां उगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।क्योंकि अधिक बरसात होने के कारण फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है।बरसात के दिनों यदि सबसे महंगे बिकने वाली सब्जी धनियां पति का है।अगर आप बरसात में धनिया की खेती करते हैं तो इसकी खेती से बहुत अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।बरसात के दिनों में हरी धनिया की मांग इतनी अधिक हो जाती है की यह बाज़ार में 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक के थोक के भाव से बिकता है।
हरे धनियां की खेती में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्में
बाजार में धनियां की उन्नत किस्मों के कई तरह के बीज़ उपलब्ध है।धनियां की अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों में हिसार सुगंध उन्नत किस्मों के बीज होते हैं।हाइब्रिड धनियां का बीज ईस्ट-वेस्ट,समृद्धि सीड्स या गंगा सीड्स के बीजों की बुवाई करनी चाहिए।अगस्त महीने में या बरसात के मौसम में इन किस्मों के बोने से अंकुरण जल्दी प्राप्त होता है।
धनियां की खेती करने के लिए भूमि का चुनाव
वैसे तो धनियां की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है,लेकिन धनियां की फसल के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट भूमि सबसे अधिक उपयुक्त होती है।लेकिन खेत बंजर एवं लवणीय भूमि नहीं होना चाहिए।धनियां की खेती करने के लिए मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच का होना चाहिए।
धनियां की खेती करने के लिए खेत की तैयारी
धनिया की बुवाई से 10 से 15 दिन पहले खेत को 2 से 3 बार खेत की जुताई करनी चाहिए।जुताई से पहले 5 से 10 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं।यदि गोबर की खाद उपलब्ध ना होने पर प्रति हेक्टेयर दो बोरी सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग करें।
धनियां की खेती में बुवाई का तरीका
धनियां के बीजों को बुवाई से पहले सावधानीपूर्वक हल्का रगड कर बीजों को दो भागों में तोड़ लें।धनियां की बुवाई सीड ड्रील की सहायता से कतारों में करें।एक कतार से दूसरे कतार की दूरी 30 सेमी एवं एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 10 से 15 सेमी के बीच रखें।भारी भूमि या अधिक उर्वरा भूमि में कतारों की दूरी 40 सेमी रखना चाहिए।धनियां की बुवाई पंक्तियों में करनी चाहिए।बीज की गहराई 2 से 4 सेमी तक होना चाहिए।बीज को अधिक गहराई पर बोने से धनियां की बीजों में कम अंकुरण होता है।इसलिए उचित गहराई का ध्यान रखते हुए धनिया की बुवाई करनी चाहिए।
धनियां की खेती में खरपतवार नियंत्रण के उपाय
धनियां अपने शुरुआती दिनों में धीमी गति से बढ़ता हैं।खरपतवार होने कि स्थिति में निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को निकलना चाहिए। सामान्यत: धनियां में दो निराई-गुड़ाई करना पर्याप्त होता है।पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 30 से 35 दिन में तथा दूसरी 60 दिन बाद करनी चाहिए।इससे धनियां की फसल अच्छी होने के साथ अधिक उत्पादन प्रदान करती है।इसके अलावा रासायनिक तरीकें से खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 1 लीटर पेन्डीमिथालीन को 600 लीटर पानी में मिलाकर बुवाई के 4 से 6 दिन के अंदर या अंकुरण से पहले छिडक़ाव करना चाहिए।
धनियां की खेती में सिंचाई
वैसे तो अगस्त महीने में धनियां की बुवाई करने पर ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है।धनियां की फसल में पहली सिंचाई 30 से 35 दिन बाद पत्ती बनने की अवस्था दूसरी सिंचाई 50-60 दिन बाद शाखा निकलने की अवस्था तीसरी सिंचाई 70-80 दिन बाद फूल आने की अवस्था तथा चौथी सिंचाई 90-100 दिन बाद बीज बनने की अवस्था करना चाहिए।इसके अलावा यदि जरूरत हो तो आवश्यकतानुसार सिंचाई की जानी चाहिए।
धनियां की खेती में कटाई
धनियां की बुआई के 50 दिन के बाद इसके पौधे मंडियों में बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं।अगर आपको दूर की मंडियों में इसको बेचना हो तो धनियां की कटाई हमेशा शाम को सूर्यास्त के बाद करना चाहिए और यदि आपके पास ही सब्जी मंडी है तो आप सुबह में इसकी कटाई करके मंडियों में ले जाकर बेच सकते हैं।धनियां की बीजों की कटाई करना चाहते है तो जब धनियां का दाना दबाने पर मध्यम कठोर तथा पत्तियां पीली पडऩे लगे।धनियां डोड़ी का रंग हरे से चमकीला भूरा होने पर तथा दानों में 18 प्रतिशत नमी रहने पर कटाई करना चाहिए।धनियां की खेती में कटाई में देरी नहीं करनी चाहिए। कटाई में देरी करने से दानों का रंग खराब हो जाता है।जिससे कारण बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पाती है।