नेपोटिस्म के चक्रव्यूह में देश ,राजनीति,फिल्म इन्डस्ट्री हर क्षेत्र में नेपोटिस्म का बोलबाला।

जमुई
संजय कुमार की रिपोर्ट 
“नेपोटिज्म”अंग्रेजी भाषा का शब्द है। हिंदी भाषा में इसका अर्थ है- “भाई भतीजावाद” रिश्तेदारों को तरजीह देना, मतलब “रिश्तेदारों को अनैतिक फायदा पहुंचाना। आज के समय में हर क्षेत्र में परिवारवाद बढ़ता ही जा रहा है। आये दिन हमें यह खबर देखने को मिलता ही रहता है कि उनके साथ ये हुआ, इनके साथ वो हुआ, मतलब यह है कि हर क्षेत्र में लोग अपना दबदबा ही बनाए रखना चाहते हैं। उनका मुख्य लक्ष्य यह होता है कि उस क्षेत्र में उनके बच्चे, उनके रिश्तेदारों ही आगे बढ़े, वे लोग हमेशा बाहर से आए हुए मेहनती लोगों का विरोध करते, उनके कामों में तरह-तरह की बाधाएं डालते, ताकि वह उन इंडस्ट्रीज या पेशा छोड़ कर भाग जाये ताकि उनके बच्चे को मौका मिले, चाहे उन्हें कुछ आता हो या नहीं। बीते 14 जून को बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद सिनेमा जगत से लेकर सामान्य जन तक हलचल मची हुई है। इस प्रतिभावान युवा अभिनेता के इस तरह चले जाने से लोगों को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय सिनेमा विशेषकर बॉलीवुड में “भाई-भतीजावाद” यानी कि नेपोटिस्म की बहस नई नहीं है। परंतु सुशांत की आत्महत्या के संदर्भ में इन दिनों इसका एक तीव्र और तीखा उभार देखने को मिल रहा है। ना केवल सामान्य जन अपितु सियासत और सिनेमा जगत के अनेक नाम भी इस विमर्श में कूद पड़े हैं और इसे अपने अपने हिसाब से दिशा देने में लगे हैं। इस विमर्श को खड़ा करने वालों का मूल स्वर यही है कि नेपोटिज्म के कारण सिनेमा जगत में सुशांत सिंह राजपूत के लिए कठिनाइयां खड़ी की गई और इसी कारण वे अपनी जान देने को विवश हुए। बॉलीवुड में नेपोटिज्म का मामला हमेशा ही सामने आता है। लेकिन हम लोग इसे इग्नोर कर देते हैं। अक्सर फिल्म इंडस्ट्री में बाहर के आए लोग जिनकी कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं होते, उन्हें ये फिल्मी दुनिया के लोग आगे बढ़ने नहीं देना चाहते। समय-समय पर बहुत सारे बाहर से आए लोग, अपने हुनर और मेहनत के दम पर आए एक्टर- एक्ट्रेस ये बोलते रहते हैं कि उनके साथ ये बॉलीवुड के लोग गलत व्यवहार करते हैं, उनका विरोध करते हैं और उनके कामों में बाधा डालते हैं।इसी षडयंत्र में बिहार के होनहार युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का बम्बई महानगरी के लोगों ने काल के गाल में समा दिये।