जनादेश न्यूज़ नेटवर्क
रजौली (नवादा) प्रखंड क्षेत्र मेंपशुओं के पेट में कीड़े ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पशुपालन में रोजगार दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है।वर्तमान समय में पशुपालन एक बेहतर व्यवसाय के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।पशुपालन व्यवसाय से जुड़कर कई किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और अपनी आजीविका में बदलाव ला रहे हैं।इसलिए रजौली में खेती के बाद पशुपालन भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।लेकिन कई बार किसानों को पशुपालन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है।जानकारी के अभाव के कारण पशुपालकों को अक्सर भारी नुकसान उठाना पड़ता है।नुकसान से बचने के लिए यह जानना जरूरी है कि पशुओं के पेट में कीड़े होना एक ऐसी बीमारी है।जिससे पशुपालक एक आम बीमारी मानते हैं।लेकिन अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो यह बहुत गंभीर बीमारी साबित हो सकती है।
क्या है,जानवरों के कीड़े लगने के लक्षण
ऐसा माना जाता है कि अगर जानवरों के पेट में कीड़े हों तो जानवर जो भी खाता है।उसका बड़ा हिस्सा कीड़े खा जाते हैं।रजौली पशु चिकित्सक के मुताबिक जानवरों के पेट में कीड़े उन्हें दिए गए भोजन का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा खा जाते हैं।पेट में कीड़ों के कारण न केवल पशुओं का स्वास्थ्य कमजोर हो जाता है,बल्कि पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।ऐसे में अगर पशुपालक अपने पशुओं को हर तीन महीने में पेट के कीड़ों की दवा दें तो यह फायदे का सौदा होगा और नुकसान को कम किया जा सकता है।
पशुओ के पेट में कीड़े होने के लक्षण
