किसानों की बड़ी परेशानी,गेहूं की पटवन करने के बाद नहीं मिल रही खाद,उत्पादन पर भी पड़ेग असर।

जमुई
जनादेश न्यूज जमुई
गिद्धौर (अजित कुमार) प्रखंड मैं किसानों की परेशानी कम होने की नाम ही नहीं ले रही है। पहले तो डीएपी की कमी ने किसान जिस हिसाब से गेहूं की खेती करनी चाहिए वह नहीं करने दिया। अब जो खेत आबाद है उनमें पटवन का उपयुक्त समय होने पर किसान की ओर से निजी पंप सेट से खेतों की सिंचाई करना पर पड़ा। अब किसी तरह सिंचाई हो गई। तो खेतों में छिटने के लिए यूरिया खाद भी नहीं मिल रही है। किसान इस बात से काफी नाराज है। कि प्रखंड के रतनपुर, पतसंडा, सेवा, मौरा, कोल्हुआ, कुंधुर,पुर्वी गुगुलडीह,गंगरा आदि पंचायत के किसान का मानना है कि सरकार की ओर से किसान किसी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रतनपुर गांव निवासी रंजीत यादव ने बताया कि सरकार की उदासीनता के कारण खेती करना जंग लड़ने से भी कठिन हो गया है। सरकार की ओर से घोषणा भले की जो भी किया जाता हो। सच्चाई यही है कि सरकार की ओर से मिलने वाले बीज से लेकर खाद तक का लाभ लेने के लिए किसानों को ऐसी मशक्कत करनी पड़ती है। मानो हम खाद के लिए नहीं आकर किसी जंग के मैदान में खड़े हैं। वही किसान लखन यादव ने बताया कि पहले डीएपी खाद ब्लैक से लेकर किसी तरह गेहूं के खेतों को आबाद किया। अब जब पहली पटवन का समय आया और खेतों को पटाया तो अब यूरिया नहीं मिल रहा है। ऐसे में हम गरीब किसान खेती किस दम पर करें। कई किसानों ने तो खाद की किल्लत से परेशान होकर गेहूं की जगह मशुरी की खेती करने कर लिए विवश हो गये।वही खाद विक्रेता ने बताया कि इसके जगह इसको कंपनी ने लिक्विड नैनो यूरिया दे रही है। इससे किसान को अपने खेतों में स्प्रे करना होगा। अब हर किसान को इसके लिए स्प्रे मशीन लेना होगा। वही वैसे किसान जिन्होंने गोदाम से डीएपी खाद लेने पर फसल रहे या वैसे किसान जिन्होंने ब्लैक से खाद लेकर खेत को आबाद किया। उनके खेत की फसल पटवन का समय आ चुका है। वह निर्धारित समय 21 दिनो पर खेतों को पटवन भी कर रहे हैं। लेकिन यूरिया की कमी उन्हें भी परेशान कर रहा है। क्योंकि प्रखंड में डीएपी के बाद अब यूरिया खाद भी नहीं मिल रहा है।